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ramayan 6.75.37: वानरों की गर्जना और राक्षसों के कोलाहल के ऊपर भी भगवान राम के धनुष की टंकार सुनाई दे रही थी ॥37॥   |   ramayan सर्ग 6.75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.75.37 
उद‍्घुष्टं वानराणां च राक्षसानां च नि:स्वनम्।
ज्याशब्दस्तावुभौ शब्दावति रामस्य शुश्रुवे॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वानरों की गर्जना और राक्षसों के कोलाहल के ऊपर भी भगवान राम के धनुष की टंकार सुनाई दे रही थी ॥37॥
 
The twang of Lord Rama's bow could be heard above the roaring of the monkeys and the uproar of the demons. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)