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ramayan 6.74.43: वहाँ नाना प्रकार के वृक्ष और लताएँ फैली हुई थीं। कमल और कुमुदिनियाँ खिली हुई थीं। देवता और गंधर्व उस पर्वत की पूजा करते थे और वह साठ योजन ऊँचा था। 43.   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.74.43 
नानाद्रुमलताकीर्णं विकासिकमलोत्पलम्।
सेवितं देवगन्धर्वै: षष्टियोजनमुच्छ्रितम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ नाना प्रकार के वृक्ष और लताएँ फैली हुई थीं। कमल और कुमुदिनियाँ खिली हुई थीं। देवता और गंधर्व उस पर्वत की पूजा करते थे और वह साठ योजन ऊँचा था। 43.
 
Various trees and creepers were spread there. Lotus and water lilies were in bloom. Gods and Gandharvas used to worship that mountain and it was sixty yojanas high. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)