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ramayan 6.74.40: लंका के विशाल और ऊँचे द्वार भी हिल गए। घर और दरवाज़े ढह गए। उस रात मानो पूरा नगर भय से नाच रहा था। 40.   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.74.40 
सा घूर्णितमहाद्वारा प्रभग्नगृहगोपुरा।
लङ्का त्रासाकुला रात्रौ प्रनृत्तेवाभवत् तदा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
लंका के विशाल और ऊँचे द्वार भी हिल गए। घर और दरवाज़े ढह गए। उस रात मानो पूरा नगर भय से नाच रहा था। 40.
 
The huge and tall gate of Lanka also shook. Houses and doors collapsed. The entire city seemed to be dancing in fear that night. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)