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ramayan 6.74.32: हे वानर सिंह! तुम इसके शिखर पर चार औषधियाँ उगी हुई देखोगे, जो अपनी प्रभा से दसों दिशाओं को प्रकाशित करती रहेंगी।   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.74.32 
तस्य वानरशार्दूल चतस्रो मूर्ध्नि सम्भवा:।
द्रक्ष्यस्योषधयो दीप्ता दीपयन्तीर्दिशो दश॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे वानर सिंह! तुम इसके शिखर पर चार औषधियाँ उगी हुई देखोगे, जो अपनी प्रभा से दसों दिशाओं को प्रकाशित करती रहेंगी।
 
O monkey lion! You will see four medicinal herbs growing on its peak, which keep illuminating all the ten directions with their radiance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)