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ramayan 6.74.2: उस समय सबको विषाद में डूबा हुआ देखकर बुद्धिमानों में श्रेष्ठ विभीषण ने वानरराज के उन वीर सैनिकों को आश्वस्त करते हुए अपने अनुपम वचनों में कहा -॥2॥   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.74.2 
ततो विषण्णं समवेक्ष्य सर्वं
विभीषणो बुद्धिमतां वरिष्ठ:।
उवाच शाखामृगराजवीरा-
नाश्वासयन्नप्रतिमैर्वचोभि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय सबको विषाद में डूबा हुआ देखकर बुद्धिमानों में श्रेष्ठ विभीषण ने वानरराज के उन वीर सैनिकों को आश्वस्त करते हुए अपने अनुपम वचनों में कहा -॥2॥
 
At that time, seeing everyone immersed in gloom, Vibhishana, the best of the wise, reassured those brave soldiers of the Monkey King and said in his matchless words -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)