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ramayan 6.74.12: ब्रह्माजी के प्रिय अस्त्र ब्रह्मास्त्र ने दिन के चार भाग बीत जाने तक सड़सठ करोड़ वानरों को मार डाला था। जब केवल पाँचवाँ भाग, अर्थात् संध्या का समय, शेष रह गया, तब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग बंद कर दिया गया॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.74.12 
सप्तषष्टिर्हता: कोटॺो वानराणां तरस्विनाम्।
अह्न: पञ्चमशेषेण वल्लभेन स्वयंभुव:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी के प्रिय अस्त्र ब्रह्मास्त्र ने दिन के चार भाग बीत जाने तक सड़सठ करोड़ वानरों को मार डाला था। जब केवल पाँचवाँ भाग, अर्थात् संध्या का समय, शेष रह गया, तब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग बंद कर दिया गया॥12॥
 
Brahma's favourite weapon, the Brahmastra, had killed sixty-seven crore monkeys by the time four parts of the day had passed. When only the fifth part, the evening time, was left, the use of the Brahmastra was stopped.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)