श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  6.74.10-11 
सुग्रीवमङ्गदं नीलं शरभं गन्धमादनम्।
जाम्बवन्तं सुषेणं च वेगदर्शिनमेव च॥ १०॥
मैन्दं नलं ज्योतिर्मुखं द्विविदं चापि वानरम्।
विभीषणो हनूमांश्च ददृशाते हतान् रणे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव, अंगद, नील, शरभ, गंधमादन, जाम्बवान, सुषेण, वेगदर्शी, मैन्द, नल, ज्योतिर्मुख और द्विविद- इन सभी वानरों को हनुमान और विभीषण ने युद्ध में घायल पड़े हुए देखा था। 10-11॥
 
Sugriva, Angad, Neel, Sharabha, Gandhamadan, Jambavan, Sushen, Vegdarshi, Mainda, Nala, Jyotirmukh and Dwivid - all these monkeys were seen by Hanuman and Vibhishana lying injured in the war. 10-11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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