Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.74.1: जब दोनों भाई श्रीराम और लक्ष्मण युद्ध के कगार पर निश्चल पड़े थे, तब वानर सेना में व्याकुलता छा गई। यहाँ तक कि सुग्रीव, नील, अंगद और जाम्बवान भी उस समय कुछ नहीं सोच पा रहे थे।   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.74.1 
तयोस्तदासादितयो रणाग्रे
मुमोह सैन्यं हरियूथपानाम्।
सुग्रीवनीलाङ्गदजाम्बवन्तो
न चापि किंचित् प्रतिपेदिरे ते॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब दोनों भाई श्रीराम और लक्ष्मण युद्ध के कगार पर निश्चल पड़े थे, तब वानर सेना में व्याकुलता छा गई। यहाँ तक कि सुग्रीव, नील, अंगद और जाम्बवान भी उस समय कुछ नहीं सोच पा रहे थे।
 
When both the brothers Shri Ram and Lakshmana lay motionless at the brink of battle, the army of monkey commanders became confused. Even Sugreeva, Neel, Angad and Jambvan could not think of anything at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)