श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  6.73.72 
आवां तु दृष्ट्वा पतितौ विसंज्ञौ
निवृत्तयुद्धौ हतहर्षरोषौ।
ध्रुवं प्रवेक्ष्यत्यमरारिवास-
मसौ समासाद्य रणाग्रॺलक्ष्मीम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जब हम दोनों हर्ष और क्रोध से रहित होकर युद्ध से निवृत्त होकर मूर्छित होकर गिर पड़ेंगे, तब हमें उस अवस्था में देखकर युद्ध के मुहाने पर विजय की देवी को प्राप्त करके यह राक्षस अवश्य ही लंका नगरी में लौट जाएगा॥ 72॥
 
"When both of us, devoid of joy and anger, and having retired from the battle, fall down unconscious, then seeing us in that state, having obtained the goddess of victory at the mouth of the battle, this demon will certainly return to the city of Lanka." ॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)