श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  6.73.69 
स्वयंभुवा दत्तवरो महात्मा
समाहितोऽन्तर्हितभीमकाय:।
कथं नु शक्यो युधि नष्टदेहो
निहन्तुमद्येन्द्रजिदुद्यतास्त्र:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी से वरदान पाकर सदैव सतर्क रहने वाले इस महाबुद्धिमान योद्धा ने अपना भयानक शरीर अदृश्य कर लिया है। युद्ध में इंद्रजीत का शरीर दिखाई नहीं देता, फिर भी वह अस्त्र-शस्त्र चलाता रहता है। ऐसी स्थिति में हम उसका वध कैसे कर सकते हैं?
 
‘This great-minded warrior, who is always cautious after getting a boon from Lord Brahma, has made his fearsome body invisible. In the war, Indrajit's body is not visible, but he keeps using weapons. In such a condition, how can we kill him?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)