vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना
»
श्लोक 43
श्लोक
6.73.43
ते द्रुमै: पर्वताग्रैश्च शिलाभिश्च प्लवंगमा:।
अभ्यवर्षन्त समरे रावणिं समवस्थिता:॥ ४३॥
अनुवाद
युद्ध क्षेत्र में खड़े होकर उन वानरों ने रावण के पुत्र पर वृक्षों, पर्वत शिखरों और चट्टानों की वर्षा शुरू कर दी।
Standing in the battle field, those monkeys began showering trees, mountain peaks and rocks on Ravana's son.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×