Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.73.4: तात! दैत्यराज! जब तक इन्द्रजित जीवित है, तब तक तुम्हें चिन्ता और मोह में नहीं पड़ना चाहिए। इस शत्रु इन्द्र के बाणों से घायल होकर युद्ध में कोई भी अपने प्राण नहीं बचा सकता।॥4॥ | ramayan सर्ग 6.73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तात मोहं परिगन्तुमर्हसे
यत्रेन्द्रजिज्जीवति नैर्ऋतेश।
नेन्द्रारिबाणाभिहतो हि कश्चित्
प्राणान् समर्थ: समरेऽभिपातुम्॥ ४॥
अनुवाद
तात! दैत्यराज! जब तक इन्द्रजित जीवित है, तब तक तुम्हें चिन्ता और मोह में नहीं पड़ना चाहिए। इस शत्रु इन्द्र के बाणों से घायल होकर युद्ध में कोई भी अपने प्राण नहीं बचा सकता।॥4॥
‘Tat! Demon King! As long as Indrajit is alive, you should not fall into worries and illusions. No one can save his life in battle after getting injured by the arrows of this enemy Indra. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥