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श्लोक  6.73.39 
ते भिन्नगात्रा: समरे वानरा: शरपीडिता:।
पेतुर्मथितसंकल्पा: सुरैरिव महासुरा:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जैसे युद्धभूमि में देवताओं द्वारा पीड़ित महान् राक्षसगण, उसी प्रकार इन्द्रजित के बाणों से पीड़ित वानरों के शरीर टुकड़े-टुकड़े हो गए। उनकी विजय की आशाएँ शीत से नष्ट हो गईं और वे मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े।
 
Like the great demons afflicted by the gods in the battlefield, the bodies of the monkeys afflicted by Indrajit's arrows were torn to pieces. Their hopes of victory were dashed by frost and they fell to the ground unconscious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)