Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.73.26-27h: अग्निदेव का शिखर दक्षिणावर्त दिशा में प्रकट होने लगा। उनका रंग पिघले हुए सोने के समान सुन्दर था। इस रूप में वे स्वयं प्रकट हुए और दी गई हवि स्वीकार कर रहे थे। | ramayan सर्ग 6.73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निदेव का शिखर दक्षिणावर्त दिशा में प्रकट होने लगा। उनका रंग पिघले हुए सोने के समान सुन्दर था। इस रूप में वे स्वयं प्रकट हुए और दी गई हवि स्वीकार कर रहे थे।
Agnidev's crest started appearing clockwise. His complexion was beautiful like molten gold. In this form he appeared himself and was accepting the offerings given by him. 26 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥