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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  6.73.25-26h 
सकृदेव समिद्धस्य विधूमस्य महार्चिष:॥ २५॥
बभूवुस्तानि लिङ्गानि विजयं यान्यदर्शयन्।
 
 
अनुवाद
उस एकाहुति से अग्नि प्रज्वलित हो उठी। उसमें धुआँ नहीं दिखाई दे रहा था, और बड़ी-बड़ी लपटें उठ रही थीं। उस समय उस अग्नि से वे सभी चिह्न प्रकट हुए, जिन्होंने पूर्व में उसे विजय का संकेत दिया था - युद्धभूमि में उसे विजयी बनाया था।
 
The fire blazed up with that one-offering. There was no smoke visible in it and huge flames were rising. At that time all those signs appeared from that fire, which had shown it its victory in the past – had made it victorious on the battlefield. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)