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ramayan 6.73.19-20h: दैत्यराज के ऐसा कहने पर इन्द्रजित ने सिर झुकाकर उनका महान् आशीर्वाद स्वीकार किया। तदनन्तर, जैसे आकाश अतुलनीय तेजस्वी सूर्य से सुशोभित होता है, उसी प्रकार सूर्य के समान पराक्रमी और तेजस्वी इन्द्रजित से लंकापुरी सुशोभित होने लगी। 19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  6.73.19-20h 
तथोक्तो राक्षसेन्द्रेण प्रत्यगृह्णान्महाशिष:।
ततस्त्विन्द्रजिता लङ्का सूर्यप्रतिमतेजसा॥ १९॥
रराजाप्रतिवीर्येण द्यौरिवार्केण भास्वता।
 
 
अनुवाद
दैत्यराज के ऐसा कहने पर इन्द्रजित ने सिर झुकाकर उनका महान् आशीर्वाद स्वीकार किया। तदनन्तर, जैसे आकाश अतुलनीय तेजस्वी सूर्य से सुशोभित होता है, उसी प्रकार सूर्य के समान पराक्रमी और तेजस्वी इन्द्रजित से लंकापुरी सुशोभित होने लगी। 19 1/2॥
 
When the demon king said this, Indrajit bowed his head and accepted his great blessing. Then, just as the sky is adorned by the incomparably bright Sun, in the same way Lankapuri began to be adorned by Indrajit, who was equally powerful and bright as the Sun. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)