श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 72: रावण की चिन्ता तथा उसका राक्षसों को पुरी की रक्षा के लिये सावधान रहने का आदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.72.16 
नावज्ञा तत्र कर्तव्या वानरेषु कदाचन।
द्विषतां बलमुद्युक्तमापतत् किं स्थितं यथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वानरों के प्रति कभी उदासीनता नहीं दिखानी चाहिए और सदैव इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि शत्रु सेना युद्ध के लिए आतुर है या नहीं? आक्रमण तो नहीं कर रही है या पहले की भाँति उसी स्थान पर खड़ी है? ॥1 6॥
 
‘One should never show indifference towards the monkeys and should always keep an eye on whether the enemy army is eager for war or not? Is it attacking or is it standing at the same place as before?’ ॥1 6॥
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