vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध
»
श्लोक 97
श्लोक
6.71.97
स वृष्यमाणो बाणौघैरतिकायो महाबल:।
अवध्यकवच: संख्ये राक्षसो नैव विव्यथे॥ ९७॥
अनुवाद
शक्तिशाली अतिकाय का कवच अभेद्य था, इसलिए युद्धभूमि में बाणों की वर्षा होने पर भी राक्षस को कोई क्षति नहीं पहुंची।
The mighty Atikaya's armour was impenetrable, so the demon was not hurt even when a shower of arrows occurred on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×