श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  6.70.58 
स सम्प्राप्य चिरात् संज्ञामृषभो वानरेश्वर:।
क्रुद्धो विस्फुरमाणौष्ठो महापार्श्वमुदैक्षत॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
बहुत देर के बाद जब होश आया तो वानरराज ऋषभ क्रोधित होकर महापार्श्व की ओर देखने लगे। उस समय उनके होठ काँप रहे थे। 58.
 
After regaining consciousness after a long time, the monkey king Rishabh became angry and started looking towards Mahaparsva. At that time his lips were quivering. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)