श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.70.57 
स तयाभिहतस्तेन गदया वानरर्षभ:।
भिन्नवक्षा: समाधूत: सुस्राव रुधिरं बहु॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
उस गदा के प्रहार से वानरराज ऋषभदेव की छाती क्षत-विक्षत हो गई, वे काँपने लगे और उनमें से रक्त बहने लगा।
 
Due to the blow of that mace, the chest of the monkey king Rishabh was mutilated. He trembled and started bleeding profusely. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)