श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.70.54 
गदामादाय संक्रुद्धो मत्तो राक्षसपुङ्गव:।
हरीन् समभिदुद्राव युगान्ताग्निरिव ज्वलन्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उस गदा को हाथ में लेकर भयंकर राक्षसराज महापार्श्व प्रलयकाल की अग्नि के समान प्रज्वलित होकर वानरों की ओर दौड़े।
 
Taking that mace in his hand, the fierce demon king Mahaparsva blazed up like the fire of doomsday and ran towards the monkeys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)