vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध
»
श्लोक 45
श्लोक
6.70.45
अमृष्यमाणस्तं घोषमुत्पपात निशाचर:।
उत्पत्य च हनूमन्तं ताडयामास मुष्टिना॥ ४५॥
अनुवाद
राक्षस उसकी दहाड़ सहन नहीं कर सका, इसलिए वह अचानक उछलकर खड़ा हो गया और उठते ही उसने हनुमान को मुक्का मार दिया।
The demon could not bear his roar, so he suddenly jumped up and stood up. As soon as he got up, he punched Hanuman.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×