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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध
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श्लोक 4
श्लोक
6.70.4
रथमादित्यसंकाशं युक्तं परमवाजिभि:।
आस्थाय त्रिशिरा वीरो वालिपुत्रमथाभ्यगात्॥ ४॥
अनुवाद
इस प्रकार वीर त्रिशिरा उत्तम घोड़ों से जुते हुए सूर्य के समान तेजस्वी रथ पर बैठकर वालिकुमार के सामने आए॥4॥
Thus the brave Trishira came to face Valikumar sitting on a chariot as bright as the sun harnessed by excellent horses. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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