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श्लोक  6.70.33 
पितृव्यं निहतं दृष्ट्वा त्रिशिराश्चापमाददे।
हनूमन्तं च संक्रुद्धो विव्याध निशितै: शरै:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अपने पिता के भाई को मारा गया देखकर त्रिशिरा का क्रोध सीमाहीन हो गया। उसने अपना धनुष उठाया और तीखे बाणों से हनुमान पर प्रहार करना आरम्भ कर दिया।
 
Seeing his father's brother killed, Trishira's anger knew no bounds. He took up his bow and began piercing Hanuman with sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)