श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 70: हनुमान जी के द्वारा देवान्तक और त्रिशिरा का, नील के द्वारा महोदर का तथा ऋषभ के द्वारा महापार्श्व का वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.70.3 
भ्रातृव्यसनसंतप्तस्तदा देवान्तको बली।
आदाय परिघं घोरमङ्गदं समभिद्रवत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई की मृत्यु से क्रोधित होकर महाबली देवान्तक ने हाथ में एक भयंकर अस्त्र लेकर अंगद पर आक्रमण किया॥3॥
 
Angered by the death of his brother, the mighty Devantaka attacked Angad with a terrible weapon in his hand. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)