श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 7: राक्षसों का रावण और इन्द्रजित के बल-पराक्रम का वर्णन करते हुए उसे राम पर विजय पाने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.7.5 
स महेश्वरसख्येन श्लाघमानस्त्वया विभो।
निर्जित: समरे रोषाल्लोकपालो महाबल:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! महाबली लोकपाल कुबेर महादेवजी से मित्रता के कारण आपसे बड़ा वैर रखते थे; परंतु आपने युद्धस्थल में क्रोधपूर्वक उन्हें परास्त कर दिया॥5॥
 
Prabhu! The mighty Lokpal Kubera used to have a great rivalry with you due to his friendship with Mahadevji; but you defeated him angrily in the battle field. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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