Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.68.3-5: 'वह अपने पराक्रम से दो घड़ी तक कष्ट सहता रहा और अंत में श्री रामजी के तेज से शांत हो गया। उसका आधा शरीर (धड़) भयानक दिखने वाले समुद्र में समा गया और उसका आधा शरीर (सिर) नाक-कान कटने से लहूलुहान होकर लंका के द्वार पर पड़ा है। उस शरीर के साथ पर्वताकार आपका भाई कुंभकर्ण लंका के द्वार पर पड़ा है। वह श्री रामजी के बाणों से पीड़ित होकर नग्न धड़ में बदल गया, हाथ, पैर और सिर से रहित हो गया और दावानल में जले हुए वृक्ष की तरह भस्म हो गया।'॥3-5॥ | ramayan सर्ग 6.68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'वह अपने पराक्रम से दो घड़ी तक कष्ट सहता रहा और अंत में श्री रामजी के तेज से शांत हो गया। उसका आधा शरीर (धड़) भयानक दिखने वाले समुद्र में समा गया और उसका आधा शरीर (सिर) नाक-कान कटने से लहूलुहान होकर लंका के द्वार पर पड़ा है। उस शरीर के साथ पर्वताकार आपका भाई कुंभकर्ण लंका के द्वार पर पड़ा है। वह श्री रामजी के बाणों से पीड़ित होकर नग्न धड़ में बदल गया, हाथ, पैर और सिर से रहित हो गया और दावानल में जले हुए वृक्ष की तरह भस्म हो गया।'॥3-5॥
‘He suffered for two hours with his might and finally calmed down with the brilliance of Shri Ram. Half of his body (torso) entered the terrifying looking ocean and the other half of his body (head) is lying at the gate of Lanka bleeding due to the cut off nose and ears. With that body your brother Kumbhakarna, who is of mountain size, is lying blocking the gate of Lanka. He was afflicted by the arrows of Shri Ram and turned into a naked torso, devoid of hands, legs and head and got destroyed like a tree burnt in a forest fire.’॥ 3-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥