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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.68.24 
इति बहुविधमाकुलान्तरात्मा
कृपणमतीव विलप्य कुम्भकर्णम्।
न्यपतदपि दशाननो भृशार्त-
स्तमनुजमिन्द्ररिपुं हतं विदित्वा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अनेक प्रकार से विलाप करता हुआ वह दस सिर वाला रावण व्याकुल हो गया और अपने छोटे भाई इन्द्र के शत्रु कुम्भकर्ण के वध को स्मरण करके अत्यन्त व्याकुल होकर पुनः पृथ्वी पर गिर पड़ा।
 
Having thus lamented in various ways and in a pitiable manner, the ten-headed Ravana became distraught and remembering the killing of his younger brother, Indra's enemy Kumbhakarna, he again fell on the earth, extremely distressed.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डेऽष्टषष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें अड़सठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)