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ramayan 6.68.18: यदि मैं युद्धभूमि में अपने भाई को मारने वाले राम को न मार सकूँ, तो मेरा मर जाना ही अच्छा है। इस व्यर्थ जीवन को धारण करना कभी भी अच्छा नहीं है॥18॥   |   ramayan सर्ग 6.68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.68.18 
यद्यहं भ्रातृहन्तारं न हन्मि युधि राघवम्।
ननु मे मरणं श्रेयो न चेदं व्यर्थजीवितम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं युद्धभूमि में अपने भाई को मारने वाले राम को न मार सकूँ, तो मेरा मर जाना ही अच्छा है। इस व्यर्थ जीवन को धारण करना कभी भी अच्छा नहीं है॥18॥
 
‘If I cannot kill Rama, who has killed my brother, on the battlefield, then it is better that I die. It is never good to preserve this useless life.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)