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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.68.12 
इदानीं खल्वहं नास्मि यस्य मे पतितो भुज:।
दक्षिणोऽयं समाश्रित्य न बिभेमि सुरासुरात्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस समय मैं निश्चय ही कुछ भी नहीं हूँ, क्योंकि मेरा दाहिना बाहु कुम्भकर्ण नष्ट हो गया है। जिसके भरोसे मैं किसी देवता या राक्षस से नहीं डरता था॥12॥
 
‘At this moment I am definitely nothing, because my right arm Kumbhakarna has been destroyed. Relying on which I was not afraid of any god or demon.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)