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ramayan 6.68.11: हे पराक्रमी योद्धा! शत्रु सेना को क्षुब्ध करके, मेरे और इन भाइयों के काँटों को दूर किए बिना, मुझे अकेला छोड़कर आप कहाँ जा रहे हैं?॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.68.11 
मम शल्यमनुद‍्धृत्य बान्धवानां महाबल।
शत्रुसैन्यं प्रताप्यैक: क्व मां संत्यज्य गच्छसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी योद्धा! शत्रु सेना को क्षुब्ध करके, मेरे और इन भाइयों के काँटों को दूर किए बिना, मुझे अकेला छोड़कर आप कहाँ जा रहे हैं?॥11॥
 
O mighty warrior! Where are you going leaving me alone after infuriating the enemy army without removing the thorns of me and these brothers?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)