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ramayan 6.68.10: (वह रोते हुए कहने लगा-) 'हे वीर! हे महाबली कुम्भकर्ण! तुम शत्रुओं का गर्व चूर करने वाले थे; किन्तु दुर्भाग्यवश तुम मुझे असहाय छोड़कर यमलोक चले गए॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 68: कुम्भकर्ण के वध का समाचार सुनकर रावण का विलाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.68.10 
हा वीर रिपुदर्पघ्न कुम्भकर्ण महाबल।
त्वं मां विहाय वै दैवाद् यातोऽसि यमसादनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
(वह रोते हुए कहने लगा-) 'हे वीर! हे महाबली कुम्भकर्ण! तुम शत्रुओं का गर्व चूर करने वाले थे; किन्तु दुर्भाग्यवश तुम मुझे असहाय छोड़कर यमलोक चले गए॥10॥
 
(He started crying and said-) 'Oh brave one! Oh mighty Kumbhakarna! You were going to crush the pride of the enemies; but unfortunately you left me helpless and went to Yamaloka.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)