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ramayan 6.67.93: तदनन्तर महाबली राक्षस कुम्भकर्ण लंकापुरी से अचानक निकलकर युद्धस्थल में उस भयानक वानर सेना को अपना भोजन बनाने लगा, मानो प्रलयकाल की प्रज्वलित अग्नि प्रजा को भस्म कर रही हो।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  6.67.93 
तत: स पुर्या: सहसा महौजा
निष्क्रम्य तद् वानरसैन्यमुग्रम्।
बभक्ष रक्षो युधि कुम्भकर्ण:
प्रजा युगान्ताग्निरिव प्रवृद्ध:॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर महाबली राक्षस कुम्भकर्ण लंकापुरी से अचानक निकलकर युद्धस्थल में उस भयानक वानर सेना को अपना भोजन बनाने लगा, मानो प्रलयकाल की प्रज्वलित अग्नि प्रजा को भस्म कर रही हो।
 
Thereafter, the mighty demon Kumbhakarna suddenly came out of Lankapuri and started making that terrible monkey army his food in the battlefield, like the burning fire of Doomsday devouring the people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)