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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.67.92 
गते च तस्मिन् सुरराजशत्रु:
क्रोधात् प्रदुद्राव रणाय भूय:।
अनायुधोऽस्मीति विचिन्त्य रौद्रो
घोरं तदा मुद‍्गरमाससाद॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के भाग जाने पर इन्द्रद्वेषी राक्षस पुनः युद्ध के लिए दौड़ा। उस समय उसने यह सोचकर कि उसके पास कोई अस्त्र नहीं है, एक बहुत ही भयानक गदा उठा ली।
 
When Sugreeva escaped, the Indra-hating demon again ran for battle. At that time, thinking that he had no weapon, he took a very scary club.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)