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ramayan 6.67.87: कुंभकर्ण के पूरे शरीर से खून बह रहा था, उसके कान और नाक के निचले हिस्से कट गए थे और सुग्रीव के दांतों और नाखूनों से उसकी बगलें फट गई थीं। तब उसे बहुत क्रोध आया और उसने सुग्रीव को पलटकर ज़मीन पर पटक दिया। पटकने के बाद, वह उसे ज़मीन पर रगड़ने लगा।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  6.67.87 
स कुम्भकर्णो हृतकर्णनासो
विदारितस्तेन रदैर्नखैश्च।
रोषाभिभूत: क्षतजार्द्रगात्र:
सुग्रीवमाविध्य पिपेष भूमौ॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण के पूरे शरीर से खून बह रहा था, उसके कान और नाक के निचले हिस्से कट गए थे और सुग्रीव के दांतों और नाखूनों से उसकी बगलें फट गई थीं। तब उसे बहुत क्रोध आया और उसने सुग्रीव को पलटकर ज़मीन पर पटक दिया। पटकने के बाद, वह उसे ज़मीन पर रगड़ने लगा।
 
Kumbhakarna's entire body was bleeding as the lower part of his ears and nose were cut and his sides were torn by Sugreeva's teeth and nails. Then he became very angry and he turned Sugreeva around and threw him on the ground. After throwing him, he started rubbing him on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)