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ramayan 6.67.75: मैं युद्धभूमि में महाबली कुम्भकर्ण के शरीर को अपनी मुट्ठियों से टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा; जब वह मेरे हाथों मारा जाएगा और वानरराज सुग्रीव उसकी कैद से मुक्त हो जाएगा, तब समस्त वानर हर्ष से भर जाएँगे; ऐसा ही हो॥ 75॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  6.67.75 
मया हते संयति कुम्भकर्णे
महाबले मुष्टिविशीर्णदेहे।
विमोचिते वानरपार्थिवे च
भवन्तु हृष्टा: प्लवगा: समग्रा:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्धभूमि में महाबली कुम्भकर्ण के शरीर को अपनी मुट्ठियों से टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा; जब वह मेरे हाथों मारा जाएगा और वानरराज सुग्रीव उसकी कैद से मुक्त हो जाएगा, तब समस्त वानर हर्ष से भर जाएँगे; ऐसा ही हो॥ 75॥
 
On the battlefield, I shall smash the body of the mighty Kumbhakarna into pieces with my fists; when he is killed by my hands and the monkey king Sugreeva is freed from his captivity, all the monkeys will be filled with joy; may it be so.॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)