Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.7: वह अपनी दोनों भुजाओं में सोलह, आठ, दस, बीस और तीस वानरों को इकट्ठा कर लेता और बड़े क्रोध से उन्हें खाते हुए सब दिशाओं में दौड़ता, जैसे गरुड़ सर्पों को खा जाते हैं। | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
षोडशाष्टौ च दश च विंशत्त्रिंशत्तथैव च।
परिक्षिप्य च बाहुभ्यां खादन् स परिधावति।
भक्षयन् भृशसंक्रुद्धो गरुड: पन्नगानिव॥ ७॥
अनुवाद
वह अपनी दोनों भुजाओं में सोलह, आठ, दस, बीस और तीस वानरों को इकट्ठा कर लेता और बड़े क्रोध से उन्हें खाते हुए सब दिशाओं में दौड़ता, जैसे गरुड़ सर्पों को खा जाते हैं।
He would gather sixteen, eight, ten, twenty and thirty monkeys in his two arms and would run in all directions, devouring them with great anger, just as Garuda consumes snakes. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥