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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  6.67.60 
तच्छैलशृङ्गं सहसा विभिन्नं
भुजान्तरे तस्य तदा विशाले।
ततो विषेदु: सहसा प्लवंगा
रक्षोगणाश्चापि मुदा विनेदु:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
किन्तु वह शिला-शिखर उसके विशाल वक्ष से टकराकर अचानक टुकड़े-टुकड़े हो गया। यह देखकर वानरगण तत्काल दुःखी हो गए और राक्षसगण हर्ष से गर्जना करने लगे।
 
But the rock peak suddenly broke into pieces on colliding with his huge chest. Seeing this the monkeys immediately became sad and the demons started roaring with great joy. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)