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ramayan 6.67.57: सत्य और धैर्य से परिपूर्ण वानरराज के ये वचन सुनकर महाबली राक्षस कुम्भकर्ण ने कहा-॥57॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.67.57 
तद् वाक्यं हरिराजस्य सत्त्वधैर्यसमन्वितम्।
श्रुत्वा राक्षसशार्दूल: कुम्भकर्णोऽब्रवीद् वच:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
सत्य और धैर्य से परिपूर्ण वानरराज के ये वचन सुनकर महाबली राक्षस कुम्भकर्ण ने कहा-॥57॥
 
Hearing these words of the monkey king, full of truth and patience, the great demon Kumbhakarna said -॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)