Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.67.43-44h: बार-बार गर्जना करते हुए उन्होंने हाथ में एक विशाल शिला शिखर लिया और उस शिखर से कुंभकर्ण के सिर पर प्रहार किया, जिससे उसके पीछे आने वाले सभी राक्षस भयभीत हो गए॥43 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  6.67.43-44h 
शैलशृङ्गं महद् गृह्य विनदन् स मुहुर्मुहु:।
त्रासयन् राक्षसान् सर्वान् कुम्भकर्णपदानुगान्॥ ४३॥
चिक्षेप शैलशिखरं कुम्भकर्णस्य मूर्धनि।
 
 
अनुवाद
बार-बार गर्जना करते हुए उन्होंने हाथ में एक विशाल शिला शिखर लिया और उस शिखर से कुंभकर्ण के सिर पर प्रहार किया, जिससे उसके पीछे आने वाले सभी राक्षस भयभीत हो गए॥43 1/2॥
 
Roaring repeatedly, he took a huge rock peak in his hand and struck the head of Kumbhakarna with the peak, frightening all the demons who were following him. ॥ 43 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)