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ramayan 6.67.35: कुम्भकर्ण अपने पातालरूपी मुख में वानरों को डालता था और वे उसके कान और नासिकाद्वार से निकल जाते थे ॥35॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.67.35 
प्रक्षिप्ता: कुम्भकर्णेन वक्त्रे पातालसंनिभे।
नासापुटाभ्यां संजग्मु: कर्णाभ्यां चैव वानरा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
कुम्भकर्ण अपने पातालरूपी मुख में वानरों को डालता था और वे उसके कान और नासिकाद्वार से निकल जाते थे ॥35॥
 
Kumbhakarana used to throw monkeys into his underworld-like mouth and they used to come out through his ears and nostrils. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)