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ramayan 6.67.21: हनुमान को इस प्रहार से पीड़ित देखकर राक्षसों के हर्ष का पारावार न रहा। वे अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगे। उधर, कुंभकर्ण के भय से व्याकुल वानर युद्धभूमि से भागने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.67.21 
ततो विनेदु: सहसा प्रहृष्टा
रक्षोगणास्तं व्यथितं समीक्ष्य।
प्लवंगमास्तु व्यथिता भयार्ता:
प्रदुद्रुवु: संयति कुम्भकर्णात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हनुमान को इस प्रहार से पीड़ित देखकर राक्षसों के हर्ष का पारावार न रहा। वे अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगे। उधर, कुंभकर्ण के भय से व्याकुल वानर युद्धभूमि से भागने लगे।
 
Seeing Hanuman suffering from the blow, the joy of the demons knew no bounds. They suddenly started shouting loudly. Meanwhile, the monkeys, afflicted and distressed by the fear of Kumbhakarna, started fleeing from the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)