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ramayan 6.67.172: जब ब्राह्मणों और देवताओं का शत्रु महाबली कुंभकर्ण युद्ध में मारा गया, तब पृथ्वी कांपने लगी, पर्वत हिलने लगे और समस्त देवता हर्ष से भरकर जोर-जोर से कोलाहल करने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  6.67.172 
तस्मिन् हते ब्राह्मणदेवशत्रौ
महाबले संयति कुम्भकर्णे।
चचाल भूर्भूमिधराश्च सर्वे
हर्षाच्च देवास्तुमुलं प्रणेदु:॥ १७२॥
 
 
अनुवाद
जब ब्राह्मणों और देवताओं का शत्रु महाबली कुंभकर्ण युद्ध में मारा गया, तब पृथ्वी कांपने लगी, पर्वत हिलने लगे और समस्त देवता हर्ष से भरकर जोर-जोर से कोलाहल करने लगे।
 
When the great Kumbhakarna, the enemy of the Brahmins and the gods, was killed in the battle, the earth began to tremble, the mountains began to move and all the gods filled with joy began to make loud noises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)