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ramayan 6.67.17: तत्पश्चात् उन्होंने हाथ में तीक्ष्ण भाला लेकर उस भयंकर वानरों की सेना पर आक्रमण किया। यह देखकर हनुमान जी आक्रमणकारी राक्षस का सामना करने के लिए हाथ में एक पर्वत शिखर लेकर खड़े हो गए॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.67.17 
ततो हरीणां तदनीकमुग्रं
दुद्राव शूलं निशितं प्रगृह्य।
तस्थौ स तस्यापतत: परस्ता-
न्महीधराग्रं हनुमान् प्रगृह्य ॥ १ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने हाथ में तीक्ष्ण भाला लेकर उस भयंकर वानरों की सेना पर आक्रमण किया। यह देखकर हनुमान जी आक्रमणकारी राक्षस का सामना करने के लिए हाथ में एक पर्वत शिखर लेकर खड़े हो गए॥17॥
 
Thereafter he attacked that fierce army of monkeys with his sharp spear in his hand. Seeing this Hanuman ji stood up with a mountain peak in his hand to face the attacking demon.॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)