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ramayan 6.67.169: कुण्डलों से विभूषित कुम्भकर्ण का वह विशाल सिर प्रातःकाल सूर्योदय के समय आकाश के मध्य में बैठे हुए चन्द्रमा के समान पीला दिखाई देता था ॥169॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  6.67.169 
कुम्भकर्णशिरो भाति कुण्डलालंकृतं महत्।
आदित्येऽभ्युदिते रात्रौ मध्यस्थ इव चन्द्रमा:॥ १६९॥
 
 
अनुवाद
कुण्डलों से विभूषित कुम्भकर्ण का वह विशाल सिर प्रातःकाल सूर्योदय के समय आकाश के मध्य में बैठे हुए चन्द्रमा के समान पीला दिखाई देता था ॥169॥
 
That huge head of Kumbhakarna decorated with earrings looked as pale as the moon sitting in the middle of the sky at sunrise in the morning. 169॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)