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ramayan 6.67.158: वायुव्यास्त्र से एक भुजा कट जाने पर कुम्भकर्ण शिखरहीन पर्वत के समान दिखाई देने लगा। उसने एक हाथ से ही ताड़ का वृक्ष उखाड़ लिया और युद्धभूमि में राजा राम पर उससे आक्रमण किया॥158॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  6.67.158 
स कुम्भकर्णोऽस्त्रनिकृत्तबाहु-
र्महासिकृत्ताग्र इवाचलेन्द्र:।
उत्पाटयामास करेण वृक्षं
ततोऽभिदुद्राव रणे नरेन्द्रम्॥ १५८॥
 
 
अनुवाद
वायुव्यास्त्र से एक भुजा कट जाने पर कुम्भकर्ण शिखरहीन पर्वत के समान दिखाई देने लगा। उसने एक हाथ से ही ताड़ का वृक्ष उखाड़ लिया और युद्धभूमि में राजा राम पर उससे आक्रमण किया॥158॥
 
After one of his arms was cut off by Vayavyastra, Kumbhkarna began to look like a peakless mountain. He uprooted a palm tree with just one hand and attacked King Rama with it on the battlefield.॥158॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)