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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  6.67.151 
स कुम्भकर्णस्य वचो निशम्य
राम: सुपुङ्खान् विससर्ज बाणान्।
तैराहतो वज्रसमप्रवेगै-
र्न चुक्षुभे न व्यथते सुरारि:॥ १५१॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण की यह बात सुनकर श्रीराम ने उस पर सुन्दर पंखों वाले अनेक बाण छोड़े। उन वज्र के समान वेगवान बाणों से अत्यन्त घायल होने पर भी देवताओं का शत्रु वह राक्षस न तो विचलित हुआ और न ही व्याकुल हुआ।
 
Hearing this from Kumbhakarna, Shri Ram shot many arrows with beautiful feathers at him. Even after being deeply wounded by those arrows which were as fast as thunderbolts, that demon who was the enemy of gods was neither agitated nor distressed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)