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ramayan 6.67.141: इस प्रकार प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी राक्षस-मुख वाले कुम्भकर्ण को देखकर पुरुषार्थी श्री राम ने तुरन्त ही अपना धनुष खींच लिया॥141॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  6.67.141 
तं दृष्ट्वा राक्षसश्रेष्ठं प्रदीप्तानलवर्चसम्।
विस्फारयामास तदा कार्मुकं पुरुषर्षभ:॥ १४१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी राक्षस-मुख वाले कुम्भकर्ण को देखकर पुरुषार्थी श्री राम ने तुरन्त ही अपना धनुष खींच लिया॥141॥
 
Thus, seeing the demon-headed Kumbhakarna, who was as bright as blazing fire, the male-dominated Shri Ram immediately drew his bow. 141॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)