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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  6.67.134 
क्रोधरक्तेक्षणो धीरो निर्दहन्निव चक्षुषा।
राघवो राक्षसं वेगादभिदुद्राव वेगित:।
यूथपान् हर्षयन् सर्वान् कुम्भकर्णबलार्दितान्॥ १३४॥
 
 
अनुवाद
उस समय उसकी आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। वीर और साहसी श्री रघुनाथजी उसे ऐसे देखने लगे मानो उसे अपनी दृष्टि से जला डालेंगे। उन्होंने बड़े वेग से उस राक्षस पर आक्रमण किया, जिससे कुंभकर्ण के बल से पीड़ित समस्त वानर सरदारों का हर्ष बढ़ गया।
 
At that time his eyes were turning red with anger. The brave and courageous Sri Raghunath started looking at him as if he would burn him with his sight. He attacked the demon with great speed, increasing the joy of all the monkey leaders who were suffering from Kumbhakarna's strength.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)