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ramayan 6.67.122: खून से लथपथ और असहनीय क्रोध से भरा हुआ, वह सभी दिशाओं में भागा और बंदरों, भालुओं और यहां तक ​​कि राक्षसों को भी खाता गया।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  6.67.122 
स तीव्रेण च कोपेन रुधिरेण च मूर्च्छित:।
वानरान् राक्षसानृक्षान् खादन् स परिधावति॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
खून से लथपथ और असहनीय क्रोध से भरा हुआ, वह सभी दिशाओं में भागा और बंदरों, भालुओं और यहां तक ​​कि राक्षसों को भी खाता गया।
 
Covered in blood and filled with unbearable rage, he ran in all directions, devouring monkeys, bears and even demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)